Supreme Court: Ram Sethu उर्फ़ Adam Bridge का क्या करना है?

ram sethu

Supreme Court ने केंद्र से Ram Sethu पर 6 हफ़्तों के अंदर अपना रुख रखने कि मांग की

त्रेता युग में जब भगवन श्री राम अपनी सेना के साथ पत्नी सीता को लंका से वापस लेने जा रहे थे, तब रास्ते में एक विशाल समुद्र पड़ा जिसे पूरी सेना के साथ लांग कर जाना असंभव था। तब श्री राम ने समुद्र से आग्रह किया कि समुद्र सेना को लंका पहुँचने के लिए रास्ता दे परन्तु समुद्र को ये शाप था की वो अपनी जगह नहीं छोड़ सकता, उपाय में समुद्र ने भगवान् शिव की आराधना कर उपाय लेने की सलाह दी। श्री राम ने अपने हाथों से मिट्टी की एक शिवलिंग बनाई जिसे आज रामेश्वरम के नाम से जाना जाता है। भगवन शिव ने प्रकट होकर राम को उपाय बताया की अगर नल और नील राम नाम लिखकर पत्थर को समुद्र में फेंकेंगे तो वे कभी नहीं डूबेंगे, नल और नील को भी उनके बचपन की हरकतों के कारण एक श्राप मिला था की वे कुछ भी समुद्र में फेंकेंगे तो वे डूबेंगे नहीं। अब नल और नील की मदद से पत्थरों पर राम नाम लिख कर समुद्र में फेंका जाने लगा और इन पत्थरों से एक सेतु बना जिसे Ram Sethu के नाम से जाना जाता है। फिर एक दिन अचानक कलयुग में भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से Ram Sethu पर उनका रुख पेश करने को कह दिया कि वे इस सेतु को तोडना चाहते हैं या बचाना।

Ram Sethu

आखिर मसला है क्या और कहाँ से शुरू हुआ:

1955 में भारत सरकार ने ए. रामास्वामी मुडलाइर के अधीन सेतुसमुद्रम परियोजना समिति बनाई गयी। इस कमेटी का काम था की वह जांचे की मन्नार की खाड़ी (श्रीलंका का वह हिस्सा जो रामसेतु का दूसरा छोर है) को Palk Bay से जोड़े जाने की कितनी सम्भावना है और Tuticorin बंदरगाह पर इसका क्या असर होगा। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में Rs.9.98 crore की लागत से दोनों प्रोजेक्ट को एक साथ चलाने की सिफारिश की। उस समय सरकार ने केवल Tuticorin बंदरगाह के लिए हामी भरी और सेतुसमुद्रम परियोजना को ठन्डे बस्ते में डाल दिया।

Ram Sethu
14 दिसम्बर 1966 को नासा ने जैमिनी-11 उपग्रह से इस रेखा का चित्र प्राप्त किया था। चित्र के अनुसार भारत के तमिलनाडु राज्य में रामेश्वरम द्वीप से लेकर श्रीलंका में मन्नार द्वीप तक 50-km की एक पतली रेखा दिखाई पड़ती है जो दोनों द्वीपों को जोड़ती है। जिसे हिन्दू माइथोलॉजी के अनुसार राम सेतु कहा जाता है एवं पश्चिमी लोग इसे आदम ब्रिज के नाम से जानते हैं, वे मानते हैं की आदम इस ब्रिज से होकर गुज़रा था। 2002 में यह तस्वीरें आम लोगो के साथ साझा कर दी गयी।

ये Ram Sethu है या Adam Bridge:

हालाँकि नासा ने अपना रुख साफ़ कर दिया की उन्हें नहीं पता की ये Ram Sethu है या Adam Bridge. उन्हें ये तस्वीरें मिली जो की साझा की। 1999 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार में रक्षा मंत्री जॉर्ज फनांडेस ने Sethu Samudram channel को खोदने का काम तीन साल में पूरा करने का आश्वासन दिया और उस समय के प्रधान मंत्री अटल बिहारी बजपेयी ने भी इसका समर्थन किया था। 2002 में हिंदू राष्ट्रवादियों ने नासा की तस्वीर को प्रमाण बताना शुरू कर दिया और 2004 में राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEER) ने इस प्रोजेक्ट की तकनीकी-आर्थिक संभावनाएं और वातावरण पर पड़ने वाले प्रभाव पर एक रिपोर्ट जमा करवाई।

man mohan singh
जून 2005 में United Progressive Alliance (UPA) की सरकार के समय प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने 2,427.40 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत के साथ निर्माण का उद्घाटन करने की घोषणा की। लेकिन मार्च 2007 में कुछ हिन्दू संगठनों ने इसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय अभियान शुरू कर दिए। इसी समय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अपने हलफनामें में रामायण में उल्‍लेखित पौराणिक चरित्रों के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान लगा दिए थे। हिन्दू धर्म को मानने वालों को यह बात पच नहीं पायी। 31 अगस्त 2007 में सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के बाद निकर्षण का काम रोक दिया गया और 14 सितंबर 2007 को इस मामले पर विशेषज्ञ पैनल बनाने का आदेश पास किया गया।

मार्च 2011 से इस परियोजना पर लगी हुई है रोक:

2008 में सुप्रीम कोर्ट ने UPA की सरकार को इसका कोई विकल्प ढूंढ़ने के लिए कहा और साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को कहा की वो पता लगाए की ये पुल मानव निर्मित है या फिर प्राकृतिक। जनवरी 2010 में सरकारी वकील सेतुसमुद्रम परियोजना विकल्प पर कुछ संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने 23 February 2010 तक सरकार को अपना रुख साफ़ करने को कहा था। जिसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई एवं मार्च 2011 तक 40% तक का काम ही पूरा किया जा सका जिसके बाद से इस परियोजना पर रोक लगी हुई है।

Supreme Court

दिक्कत कहाँ आ रही है? 

असल में इस परियोजन से कई लाभ होने है जैसे की इस सेतु की वजह से जहाजों को भारत से श्रीलंका जाने के लिए काफी घूम कर जाना पड़ता है क्यूंकि सेतु के आस पास की जगह इतनी गहरी नहीं है की जहाज़ चल सके। जिससे समय और पैसा दोनों की बचत होगी। अगर ये परियोजना लागु होती है तो सेतु का कुछ हिस्सा तोडना पड़ेगा। परन्तु अगर इस सेतु को तोड़ा गया तो हिन्दू माइथोलॉजी एवं आस्थाओं को ठेस पहुंचेगी। क्यूंकि राम सेतु रामायण में अहम् भूमिका निभाता है इनफैक्ट रामानंद सागर जी ने इसी सेतु को बनाते हुए दिखाने में एक महीना निकाल दिया था।

sethu samudram
Final Touch-up:

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग इसी साल नवंबर माह के अंत तक अपनी रिपोर्ट जमा कराएगा जिसमे बतया जायेगा की ये Ram Sethu उर्फ़ Adam Bridge मानव निर्मित है या प्राकृतिक। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश जारी किये की वो बताएं की राम सेतु को बचाना चाहते है या फिर उसे तोड़ना चाहते हैं। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को अपना रुख रखने के लिए छह हफ़्तों में शपथ पत्र दाख़िल करने का समय दिया है।

Source: Webduniya, Scroll.in, IEP, Wikipedia

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here