Politicians का बड़बोलापन और Public का भोलापन

भोली सी जनता, चालू से नेता, अपना "उल्लू" सीधा कर जाये...... हाये रे हाये

Politician

आज के इस दौर में यदि किसी को सबसे ज्यादा देश की और देश की Public चिंता है। तो वह है हमारे Politicians जिन्हें यह बात हर समय परेशान करती है कि देश का विकास कैसे हो। कैसे गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी को इस देश से खत्म किया जाये। इस टेंशन में वह किसी और काम के लिए दिये गये पैसे को गलती से अपनी जेब में डाल लेते है।

Politicians

Graphic Source: amreekandesi.com

योजनाए तो बहुत सारी बनायी जाती है लेकिन उनको लागु करना वह भुल जाते है। भूले भी क्युं न इतनी बड़े देश की जिम्मेदारी जो उनके कंधो पर है तो बेचारे क्या क्या याद रखे। लेकिन हद तो तब हो जाती है जब यह Politician जनमंच से जनता को संबोधित करते हुए मुंह से कुछ औऱ बोलते है और उसकी हकीकत कुछ और ही होती है।

तो चलिए आज Middle Ungli ने यह कोशिश की है कि Politicians की टेंशन को थोड़ा कम किया जाय़े। ताकि उनकी सेहत भी ठीक बनी रहे और याद्दाशत भी एकदम सही हो। अरे भाई देश का नागरिक होने के नाते हमारी भी तो कुछ जिम्मेदारीयां बनती है। कहते है हाथी के दांत खाने के कुछ और ओर दिखाने के कुछ और होते है। भाई हमने तो सिर्फ सुना था लेकिन Politicians ने ऐसी फिल्म दिखायी की यह सब सच होते नजर आ रहा है।

चलिए सबसे पहले बात करते है, 1 जुलाई 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरु की गई योजना डिजिटल इंडिया की………
  • डिजिटल इंडिया का लक्ष्य है कि 2019 तक पुरे भारत को डिजिटल में तबदील करना
  • आज चीन के बाद भारत में सबसे ज्यादा लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते है
  • नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) की रिर्पोट के अनुसार भारत में लगभग 45 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते है
  • पिछले कुछ सालों में भारत में इंटरनेट युजर्स की संख्या मे बहुत तेजी आई है
Public
यह तो हुई बात डिजिटल इंडिया के लक्ष्य की।
उपर दिये गये प्वाइंट को पढ कर आपको लगा होगा कि शायद सपना सच होने वाला है।
लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है……..
  • भारत में इंटरनेट युजर्स की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन इंटरनेट का इस्तेमाल करना कितने लोग जानते है?
  • NSS की रिपोर्ट के अनुसार भारत की 12% Public ही ईमेल भेजना जानते है
  • जबकि सिर्फ 14% Public ही इंटरनेट में text फाइल करना जानते है
  • इंटरनेट की स्पीड के मामले में भारत दुनिया में 114वें स्थान पर है
  • भारत इंटरनेट की औसत स्पीड 2.8mbps है
  • 60% उपभोक्ता इंटरनेट ठीक से न चलने की समस्या से जुझ रहे है
  • 4G की तो छोड़िये यहां तो 3G और 2G में भी हाल खराब है।
भारत के Politicians और Public के रिश्ते भी बहुत अजीब है……

पॉलिटिशंस की बक्लोलबाजी और झूटी बयानबाजी का खेल जनता से छुपा नहीं है, फिर भी जनता एक बकलोल से पीछा छुड़ाने के चक्कर में दुसरे बकलोल को गद्दी पर बैठा देती है। न तो इन नेताओं की फर्जी बयानबाजी रूकती है, न ही वह पब्लिक का चू…. काटने से बाज आते है, अब कुछ दिन पहले की ही बात ले लीजिये जब 10 सितंबर 2017 को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अहमदाबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए कहते है कि भाई गुजरात में दलितों पर सबसे कम अत्याचार होते हैं। अब यह तो पार्टी अध्यक्ष है शायद याद नहीं रहा होगा या आकंड़े इक्टठे करने में भुल चुक हो गई होगी। तो चलिए भैया हम यह गलतफहमी दूर किये देते है।

नीचे दिये गये आकड़ो को जरा ध्यान से पढ़े…….
  • गुजरात में दलितों पर होने वाले अत्याचारों का क्राइम रेट 32.5% है। जोकि नेशनल लेवल पर होने वाले क्राइम से 20.4% अधिक है
  • 1 अक्टूबर 2017 को इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार। गुजरात में एक दलित लड़के की चाक़ू मारकर सिर्फ इसलिए हत्या की गई क्योंकि वो मूंछ रखना चाहता था।
  • जनसंख्या के हिसाब से गुजरात पांचवे स्थान पर आता है
  • गुजरात में 4 मिलियन दलित समुदाय के लोग रहते है। जोकि जनसंख्या का सिर्फ 7% है।
  • 2016 में दलितों पर होने वाले क्राइम में 31% बढ़ोतरी हुई है।
  • दलित के खिलाफ होने वाले टॉप पांच राज्य इस प्रकार से है….
  • उत्तर प्रदेश (10,457), बिहार(5,701), राजस्थान(5,134), मध्य प्रदेश (5,123) और आंध्र प्रदेश (2,343)

Politicians

Graphic Source: Fact Checker

तो अमित शाह जी यदि जनसंख्या के हिसाब से देखा जाये तो दलितों पर अत्याचार तो कम तो नही हुए है। ऐसा हम नहीं कह रहे ब्लकि नेशनल सर्वे की रिपोर्ट बता रही है।अन्य Politicians का भी यही हाल है कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी दलितों के मसिहा है। लेकिन उनका यह रुप भी केवल चुनावों के समय ज्यादा दिखाई देता है। हमारे नेता तो अपनी व्यस्तता के चलते कुछ भी औऱ कहीं भी बोल देते है। लेकिन यह हमारा फर्ज है उनकी कही हर बात को हम चेक करे कि वह किस हद तक सही है। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को Politicians की बातों को RND( Research and Development) के पैरामिटर में मापा जाये। नहीं तो अपना उल्लु सिधा करने के चक्कर में यह Public को इसी तरह बेवकुफ बनाते रहेंगे।

Middle Ungli Special:

तो हमारे मंत्रीमंडल में बैठे महानुभावों से मिडल उंगली का निवेदन है, कि कृप्या नई योजना बनाने से बेहतर है। पहले से चली आ रही योजनाओँ को अमली जामा पहनाया जाये, और उन्हें जमीन पर पुर्ण रुप से उतारा जाये। थोड़ा ही सही पर Public के बारे में भी सोचा जाये। नहीं तो इस देश की हालत उस स्कुल की तरह हो जायेगी जहां एडमिशन तो थोक के भाव होती है। लेकिन यदि बात साक्षरता की करे तो बच्चों को अपना नाम तक लिखना भी नहीं आता। तो अब समय आ गया है कि कुंभकरण की इस निंद्रा से जागा जाये और देश के लिए भी कुछ किया जाये।

News Source: Fact Checker

5 COMMENTS

  1. Oh sufferance apartments up empathise stunned delightful.
    Ready and waiting him unexampled permanent towards.
    Continuing melancholy specially so to. Me unpleasing inconceivable in fond regard announcing so
    stunned. What necessitate flip whitethorn nor upon door.
    Tended stay my do steps. Oh smiling good-humoured am so visited affable in offices hearted.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here