फिल्म विरासत की रियासत पर सियासत Release: Padmavati

ना नौं मन तेल होगा ना राधा नाचेगी।

padmavati

पद्मावती की हालत हुई घर में रह रही बूढी माँ की तरह, फायदा तय करेगा किस घर में रहेगी।

शुद्ध हिंदी भाषा में एक मुहावरा है, ‘ना नौं मन तेल होगा ना राधा नाचेगी’ इसका मतलब होता है कारण समाप्त हो जाने पर परिणाम स्वतः ही समाप्त हो जायेंगे। यह मुहावरा इस सिचुएशन पर सटीक बैठता है इसीलिए चिपका दिया। बात कुछ ऐसी है कि Padmavati फिल्म अब उस बूढी माँ की तरह हो चुकी है जिसपर राजनीति होना स्वाभाविक है। घर में रखने या घर से निकालने की राजनीति। इस फिल्म के पति संजय लीला भंसाली की मानसिक स्थिति मुहावरों के बीच की घूम रही है आज से पहले तक जो उनका रवैय्या था कि ओखली में मुँह दिया है तो मूसल से क्या डरना वहीँ अब यह बदलकर ना नौं मन तेल होगा ना राधा नाचेगी वाली स्थिति में पहुँच चुकी है।

sanjay leela bhanshali
Source: Hindustan Times

फिल्म और राजनीति दोनों की ही जड़ कॉन्ट्रोवर्सीज से है। कौन कितनी बटोर सकता है, जो जितनी बटोरेगा वो उतनी सीट या बॉक्स ऑफिस में कमाल दिखायेगा। लेकिन जब दोनों एक दूसरे से ही कॉन्ट्रोवर्सी बटोरने लगे दोनों में से एक को किसी न किसी चीज के लिए समझौता करना पड़ता है। फिल्म Padmavati, अब एक अल्मीराह में बैठ कर एक दूसरी फिल्म देख रही है जिसका नाम है “विरासत की रियासत पर सियासत”, क्यूंकि फिल्म निर्माताओं द्वारा Padmavati को अल्मीराह में बंद कर Release डेट आगे बढ़ा दी है।

uma bharti
Source: India Today
क्या है फिल्म “विरासत की रियासत पर सियासत” कि Cast:

इस फिल्म में मुख्या भूमिका में 7 किरदार है, खुद फिल्म Padmavati, संजय लीला भंसाली, करणी सेना, सेंसर बोर्ड, सलमान खान, राखी सावंत, और कुछ राजनेता, सपोर्टिंग में दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, और शहीद कपूर (स्पेलिंग गलत नहीं है शहीद ही लिखा है).

padmavati

कहानी कुछ यूँ है:
Plot-1

कहानी की शुरुवात होती है फिल्म Padmavati के पति संजय लीला भंसाली से, भंसाली अपनी पत्नी के साथ सेंसर बोर्ड के घर जा रहे होते हैं वहीँ दूसरी तरफ करणी सेना जो कि रानी पद्मिनी की रियासत है, बैठ कर हार्ड कोर डिस्कशन कर रहे होते हैं। उधर उमा भारती (राजनैत्रि) किक की तलाश में घूम रही होती हैं। रानी पद्मिनी की विरासत संभाले करणी सेना इस नतीजे पर पहुँचती है कि भंसाली अपनी पत्नी Padmavati को परदे पर न उतार पाए। इसके लिए चाहे उन्हें कुछ भी करना पड़े। कहानी आगे बढ़ती है, और करणी सेना एक प्रेस वार्ता में ये तय कर देती है कि वे फिल्म Padmavati को परदे पर नहीं आने देंगे। क्यूंकि फिल्म में उनकी रानी के ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ हुई है।

Karni sena
Source: The Hindu
Plot-2

यही सब उतार चढाव चल रहा होता है, कि उमा भारती को किक मिल जाती है। वे तुरंत भंसाली पर निशाना साधते हुए कहती हैं कि आप ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते है। भंसाली कहते हैं फिल्म देखने के बाद तय करें की छेड़छाड़ हुई है या नहीं, पर फिल्म 1 दिसंबर को ही रिलीज़ होगी। उधर करणी सेना थिएटर में तोड़फोड़ करना शुरू कर देती है और कहती है अगर फिल्म Release हुई तो वे दीपिका पादुकोण की नाक काट देंगे, मतलब How rude, Mannerless. इतने में भाई (सलमान खान) की एंट्री होती हैं, और वे कहते है की वे भंसाली के समर्थन में है, हालाँकि भाई की गेस्ट एप्पेअरेंस है पर वे भाई है इसीलिए फुटेज पूरी मिलेगी।

salman khan
Plot-3

एक के बाद एक स्टार इसमें अपने कमैंट्स देना स्टार्ट कर देते हैं, पर राखी सावंत कि बात अलग है, वे सीधे करणी सेना पर FIR कर देती है। अलाउद्दीन खिलजी यानि रणवीर कहते हैं, वे दो सौ प्रतिशत भंसाली के साथ है। यहां पर इंटरवल यानि मध्यांतर होता है, मध्यांतर के बाद भंसाली मीडिया से कहते हैं कि Padmavati को देखें। यह बात सेंसर बोर्ड को पता लगती है तो प्रमुख नाराज़ हो जाते है, Joshi कहते है भंसाली ने नियमों का उलंघन किया है। अब भंसाली अपनी पत्नी को लेकर सेंसर बोर्ड पहुँचते है पर वहाँ से उन्हें वापस कर दिया जाता है। भंसाली इतने बड़े शहर में अपनी पत्नी के संग इधर उधर की ठोकरें खा रहे होते है कि तभी यह भी तय हो जाता है कि फिल्म Padmavati को 1 दिसम्बर को परदे पर नहीं दिखाया जा सकता। उन्हें अल्मीराह में बंद कर दिया जाए।

prsoon joshi
Source: India Today
Plot-4

फिल्म Padmavati अल्मीराह में जा पहुँचती है और मुद्दा राजनतिक अखाड़े में। अब राजनेता मुद्दे पर अपने अपने फायदे को देखते हुए भाषण और योगासन शुरू कर देतें है। फायदा आप कह सकते हैं, रियासत के वोट बैंक का। देश के अलग अलग प्रदेशों के मुख्यमंत्री इस पर अपना तर्क और फैसला सुनाना शुरू कर देतें है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में फिल्म के प्रदर्शन पर प्रतिबन्ध लगा देतें है तो कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया फिल्म को वेलकम कह देते हैं।

Plot- 5

क्लाइमेक्स में Padmavati परदे से ऑडियंस देखना चाहती है, फैन Padmavati देखना चाहते है, करणी सेना ऑडियंस से पहले फिल्म देखना चाहती है, भंसाली, सेंसर बोर्ड को फिल्म दिखाना चाहते हैं, सेंसर बोर्ड तक फिल्म पहुँच नहीं रही, कोर्ट कहता है पहले सेंसर बोर्ड देखें फिल्म, शहीद दिख नहीं रहे। मतलब कहानी पूरी तरह उलझ चुकी है। फिल्म इसी के साथ ख़त्म हो जाती है पर कहानी अधूरी रह जाती है। मिडिल ऊँगली जल्द पार्ट-2 के साथ आएगी। नीचे फिल्म रिव्यु है, कहानी के साथ रिव्यु ऑफर भी दिया जा रहा है तो प्रसाद लेकर जाएँ।
to be Continued. पार्ट-2 का इंतज़ार करें।

siddaramaiah

Shivraj

Middle Ungli Review:
  • फिल्म “विरासत की रियासत पर सियासत” में मुख्य किरदार की भूमिका में फिल्म पद्मावती है।
  • फिल्म पद्मावती एक ऐतिहासिक किरदार राजपूत रानी पद्मावती पर आधारित है।
  • विरासत की रियासत पर सियासत में हीरो या हीरोइन समझ नहीं आ रहे कौन है।
  • विलेन पता लगाने के लिए आपको कुछ खास किस्म के चश्मे पहनने होंगे, जो की कलर लेस हो
  • जैसे: सैफ्रॉन, हरा, लाल, काला, आदि।
  • कहानी जबरदस्त है, अगर फिल्मों, राजनीति, या इतिहास में से किसी एक में भी इंटरेस्ट है, तो मज़ा आ जायेगा।
  • सभी किरदार अपने अपने किरदार को बखूभी निभा रहें हैं और राजनेता फायदा भरपूर उठा रहें है।
Note:
  • फिल्म विरासत की रियासत पर सियासत पूर्ण रूप से लेखक की सोच है।
  • यह कहानी फिल्म Padmavati को लेकर सामने आ रही परिस्थितियों के आधार पर लिखी गई है।
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Source: NDTV

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