Padmavati Controversy: आज, नाक के सवाल पर बवाल क्यों?

हम सिर्फ पुतले नहीं लटकाते पद्मावती: Jaipur Nahargarh fort

History of Rajpoot
Source: INDIANRAJPOOT.COM

शुक्रवार सुबह, Jaipur Nahargarh fort पर एक आदमी का लटका हुआ शव मिला है, जिसके तार पद्मावती से जोड़े जा रहे हैं। आदमी की पहचान चेतन सैनी (40) के नाम से हुई है। चेतन जयपुर का ही रहने वाला है और अपने घर से ही आभूषणों की कारीगरी करता था। शव के पास से एक पठार बरामद हुआ है, जिस पर लिखा है, ‘हम सिर्फ पुतले नहीं लटकाते, पद्मावती’। चेतन गुरूवार को दोपहर में अपने घर से बहार गए थे, और अपनी पत्नी से आखिरी बार उसी शाम साढ़े 5 बजे बात की थी।Jaipur fort

यह तो हो गयी ख़बर, अब आते हैं ख़बर के Background पर:

इस घटना के तार फिल्म पद्मावती से जोड़े जा रहें है, आपको बता दें, अब बता क्या दें, पूरे देश को पता है की फिल्म पद्मावती पर कुछ दिनों से विवादों के भयंकर काले बदल मंडरा रहें है। मतलब ये समझ लो वाट लगी पड़ी हुई है, सिर्फ कलाकार और निर्माताओं कि ही नहीं, नेताओं से लेकर आम लोगों की। इसके तार इस कदर उलझ चुके है की कहां से घुसकर कहाँ निकल रहे है समझ नहीं आ रहा इस बारे में हम पहले भी लिख चुके हैं तो रिपीट नहीं करेंगे लिंक दे दे रहे हैं इक्छुक हो तो खोल कर पढ़ लें।

यह है, पढ़ लें- फिल्म विरासत की रियासत पर सियासत Release: Padmavati

padmavati

इन विवादों का स्तर इतना ऊपर उठ गया है कि राजपूत समझ रहें है कि अब यह उनकी नाक का सवाल बन चुका है। और वे इसे बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन हम उन्हें बताना चाहते है कि आपकी नाक का सवाल यह नहीं हैं, आपकी नाक का सवाल कया था और आपने क्या किया था। चूँकि इस मुद्दे का आधार इतिहास के तहखाने में जाकर देखा जा रहा है तो चलिए आपको वहीँ लेकर चलते हैं।

राजपूतों का इतिहास 5 हज़ार सालों से ज्यादा है जिसमे सैकड़ों पीढ़ी और कई वंश रहे तो इतना तो भैय्या हो नहीं पायेगा, तो हम सीधे मुद्दे की बातों पर आते हैं:
एक हज़ार साल पहले तक उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्से पर राजपूत राजाओं का शासन था। फिर क्यों और कैसे यह स्थिति आ गई, कि राजपूतों ने अपने राज्य और अपनी खैर सलामती के लिए अंग्रेजों के सामने घुटने तक टेक दिए और बन बैठे उनके ग़ुलाम सैनिक। पहले आप मुहम्मद गजनी से हारे, फिर ग़ौरी से, इसके बाद आपने अल्लाउद्दीन खिलजी से मात खाई और फिर बाबर, अकबर, मराठों से लेकर अंग्रेजों तक या तो आप मैदान छोड़कर भागे या घुटने टेके।

  • 1192 में तराइन की दूसरी लड़ाई के दौरान पृथ्वीराज चौहान जब मैदान छोड़ने पर आ चुके थे और ग़ौरी द्वारा उन्हें बंधक बना लिया गया और फिर मार दिया गया था, तब कहाँ गई थी आपकी नाक?
  • 1527 में खानवा की लड़ाई में जब राणा सांगा की सेना बाबर से युद्ध के दौरान मैदान छोड़ कर भाग खड़ी हुई थी, तब कहाँ गयी थी आपकी नाक?
  • 1576 में जब महाराणा प्रताप हल्दी घाटी के युद्ध के दौरान मैदान छोड़कर चले गए, तब कहाँ गयी थी आपकी नाक?

Battle of Haldi Ghati

चूँकि राजपूतों का नाम जब भी जुबां पर आता है, तो इन तीनो का नाम सर आँखों पर रखा जाता है, और जब इनकी इन पराजयों की बात की जाती है तो, मिथ का हवाला देकर बात ख़त्म कर दी जाती है।

अब आपको कुछ और राजपूती हस्तियों के बारे में बताते है, जो आपको राजपूतों के इतिहास को जान ने में थोड़ी मदद करेगा।
  • अमर सिंह राठौर, मुग़लों के शासन में दरबारी थे, और इनके पिता राजा गजराज सिंह मुग़ल शाहजहाँ के शासन में मारवाड़ की गद्दी संभाल रहे थे। अमर सिंह राठौर ने शाहजहाँ की कैद से एक बंधक को छुड़ाने में मदद की जिसकी वजह से खुद उनके पिता ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया था। यह करने वाले उनके पिता भी राजपूत ही थे।

amar singh rathore

  • अंग्रेजो द्वारा पहले विश्व युद्ध के दौरान एक कैबिनेट बनाई गयी थी जिसका नाम इम्पीरियल वॉर कैबिनेट रखा गया था, उस कैबिनेट में एक ही शख्स ऐसा था जो नॉन-वाइट यानि भारतीय था, वो थे महाराजा गंगा सिंह, गंगा सिंह बीकानेर के महाराजा थे, जो अभी राजस्थान के नाम से जाना जाता है। अंग्रेजों की तरफ से अपनों का खून बहाने वाले, वो भी राजपूत ही थे।

maharaja ganga singh

  • राजा गुलाब सिंह जिन्होंने हिन्दोस्तान की ही धरती अंग्रेजो के हाथों पैसे देकर ली। यह भी राजपूत थे।

king gulab singh

  • मिर्ज़ा राजा जय सिंह, अजमेर के राजा, जो अब जयपुर के नाम से जाना जाता है, मुग़लो के वरिष्ठ जनरल रहे। वह भी राजपूत ही थे, जो मुग़लों के काफी वफादार माने जाते थे। जिनकी बेटी का विवाह मुग़ल बादशाह औरंगजेब के बड़े बेटे बहादुर शाह से हुआ।

mirza raja jai singh

इन नामों की सूची और कहानियां कई है, और इसके विपरीत ऐसे कई नाम भी हैं, जिनकी शौर्य गाथायें अगर शुरू की जाये तो ख़त्म होने में वर्षों लग जायेंगे। इसलिए राजपूतों के साथ-साथ पूरे देश को उन वीर पुरुषों पर गर्व भी है। राजपूतों और देश द्वारा उनकी  वीरता को भी नाकारा नहीं जा सकता, यहां तक की कई नाम ऐसे हैं जिनकी वीरता का लोहा तो उनके दुश्मन भी मानते थे।

यह डोज़ करणी सेना के लिए:

तो जिस चौड़ की आप बात आज नेशनल टेलीविज़न पर आकर कर रहे है, जिस इतिहास का नगाड़ा बजा कर आप ये कह रहे हैं कि राजपूत की मान मर्यादा को धूमिल किया गया है। जिस रौब के साथ आप कह रहें है की “जौहर की ज्वाला है, बहुत कुछ जल जायेगा”, वह धुंधला है। यह रौब इतिहास में दिखाया होता, तो न हिंदुस्तान मुगलों की जागीर बनता न अंग्रेजों का गुलाम। जब आप अंग्रेजों कि जागिरदारी संभाल कर शानो-शौकत कि ज़िन्दगी बिता रहे थे, आपके बच्चो जब आराम फ़रस्ती के साथ विदेश में जाकर पढ़ रहे थे, तब देश गुलामी में तप रहा था। तब न आपकी नाक आड़े आयी, न आपकी मर्यादा, और न वीरता। आज आप चार करोड़ राजपूतों की बात करके, खुले तौर पर बहुत कुछ जलाने की बात कर रहें है, नाहरगढ़ के किले पर किसी बेक़सूर को मार कर लटका दिया जा रहा है।

karni sena आप कहते हैं, भंसाली ने इतिहास के साथ छेड़-छाड़ की है, जबकि आपने फिल्म देखी ही नहीं। हम बताते है, कि इतिहास के साथ छेड़-छाड़ किसे कहते हैं। जब राजस्थान एजुकेशन बोर्ड द्वारा, दसवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञानं कि किताब में हल्दीघाटी के युद्ध के तथ्यों के साथ छेड़-छाड़ की गई उसे इतिहास से छेड़-छाड़ कहते है।

rajput-kranti-sena

हल्दी घाटी के युद्ध में राणा, मान सिंह की सेना से हार कर मैदान छोड़कर चले गए थे, यह तथ्य हटाकर महाराणा प्रताप ने अकबर को इस युद्ध में पराजित किया था, यह तथ्य डालना, इतिहास से छेड़-छाड़ की श्रेणी में आता है।

यह डोज़ सरकार के लिए:

एक सामाजिक संगठन खुले तौर पर, देश में बहुत कुछ जलाने की बात करता है, संगठन विरोध में खुले तौर पर पब्लिक प्लेस पर तोड़ फोड़ करता है, संगठन देश के जाने माने निर्देशक पर हाथ उठाता है, संगठन खुलेआम फतवे ज़ारी करता है, कलाकारों के नाक और सर काटने पर इनाम रखता है, नेशनल टीवी पर आकर देश की एक सौ चौतीस करोड़ जनता को धमकी देता है, भड़काऊ भाषण देता है, एक बेक़सूर को किले पर मार कर लटका दिया जाता है, और आप अपनी चार टांगो वाली कुर्सी पर बैठकर यह इंतज़ार कर रहे हैं, कि चुनाव आने है। क्या इस देश की सरकार इतनी खुदगर्ज़ हो गयी है? क्या सरकार चुनाव के लालच में आपने चार करोड़ का वोट बैंक बचाने के लिए, मूक बनी बैठी है? या सरकार सिर्फ यही फैसले लेने के लिए है, कि कब कहाँ किसकी लाइन में लगना है, और किसको किससे आधार लिंक करना है।

  • हाफ़िज़ सईद की रिहाई पर आप टिपण्णी करते हैं, तो फिर इस संगठन पर क्यों नहीं?
  • सईद खुलेआम भड़काऊ भाषण देता है, और यह संगठन क्या कर रहा है?
  • भारत और पाकिस्तान में बहुत अंतर है, मै मानता था लेकिन इस घटना से वह भी ख़त्म होते हुए नज़र आ रहा है।
  • पाकिस्तान में खुले तौर पर आतंकवादी संगठन घूमते हैं, ऐसा माना जाता है, तो भारत में आज क्या स्थिति है?
  • अभिव्यक्ति की आज़ादी का हवाला देकर यह फ़तवे जारी करते हैं, राष्ट्रीय स्तर के मंच से धमकी देते हैं, और चंद नेता इनमे अपनी राजनीतिक रोटियां नहीं, बोटियाँ सेकते हैं।

Middle Ungli Special:

वैसे तो पूरा लेख ही मिडिल उंगली स्पेशल है, पर यहां स्पेशल में आप पोस्ट स्क्रिप्ट कंसीडर कर सकते हैं, पोस्ट स्क्रिप्ट मतलब होता है, जो चीजे ऊपर छूट गयी है या कुछ अन्यथा में जोड़ना है तो यहां लिख सकते हैं।
तो अगर लेख पढ़कर किसी की भावनाओं को ठेस पंहुची हो तो क्षमा प्रार्थी हूँ, पर सच यही है। चूँकि करणी सेना द्वारा इस मुद्दे को जिस तरह से लिया गया उससे पूरे देश को ठेस पहुंची है, तो एक लेखक और पत्रकार के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व करना मेरा दायित्व है। हालाँकि राजपूत समाज का बहुत बड़ा तबका भी करणी सेना की इस गतिविधि का विरोध करता है, तो यह कहना गलत होगा कि पूरा राजपूत समाज इसमें बराबर का भागीदार है।

jaipur nahargarh fort
Source: HT

घटना पर आखरी नज़र मारते हुए: चेतन के भाई का कहना है कि, चेतन का पद्मावती के फिल्म के साथ कोई लेना देना नहीं था। चेतन का मर्डर किया गया है, बहती हवा के साथ मुद्दा भी उड़ जायेगा और फिल्म की कंट्रोवर्सी में गिना जायेगा। यह एक सोची समझी साजिश है, जिसकी तहकीकात होनी चाहिए।

Source: HTWikipedia, Satyagrah Scroll, India Today

1 COMMENT

  1. बहुत सही आईना दिखाया है समाज गर्त की और जा रहा है और सभी चुप है

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