India Health Services, राम भरोसे

नेताओं ने डुबा दी India की नैया, जनता ने जबाब मांगा तो कहा हाय दइयां

India

Indian Health Services: जिंदगीं के साथ भी जिंदगीं के बाद भी यह टेग लाइन तो आपने सुनी होगी। लेकिन लगता है आज इसकी सबसे ज्यादा जरुरत India सरकार के स्वास्थय विभाग को है। जरुरत होनी भी चाहिए क्यूंकि India में स्वास्थय सेंवाओं जो इतनी बेहतर है। जिसके चलते छोटे शहर के लोगों को इलाज करवाने के लिए बड़े शहर के दरवाजे पर दस्तक देनी पड़ती है। इसकी मुख्य वजह उनके शहर में उचित स्वास्थय सुविधा का न होना है। इसी सिलसिले में हमने नवनिर्वाचित केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे का एक विवादस्पद बयान भी सुना।

Ashwini Choube

जिसमे उन्होंने ने कहा की बिहार से इलाज़ करवाने के लिए आये हुए लोग AIIMS में भीड़ लगा देते है। लगता है मंत्री जी ने AIIMS  सिर्फ अपना इलाज करवाने के लिए खोला है। कोई उनसे यह तो पूछे कि वो भी बिहार से ही संबंध रखते है। तो बीमार पड़ने पर वो अपना इलाज़ करवाने AIIMS आते है या फिर बिहार जाते है। अरे अभी तो बस शुरुआत थी, मंत्री जी इतना कह कर ही चुप नहीं हुए ब्लकिअपनी समझदारी का परिचय देते हुए उन्होंने AIIMS के डॉक्टरों को भी सलाह दी की वो बिहार से आने वाले लोगो को वापिस बिहार भेज दे।

Middle Ungli

उनका मानना है की बिहारी अपनी छोटी मोटी बीमारी के लिए भी AIIMS  चले आते है। AIIMS तो बिहारीयों के घर की सामने वाली गली में पड़ता है न जो पेट दर्द और सिर दर्द के लिए भी उसके चक्कर काटते है। जिस भीड़ को वो AIIMS से हटाना चाहते है असल में वह उस भीड़ को रैलियों में लाना चाहते है। यह तो भला हो डॉक्टर शाह आलम खान साहब का जिन्होने अपने दायित्व को समझा और सीधे शब्दों में मंत्री जी को कह डाला। हम मरीज़ का इलाज़ करने से मना नहीं करेंगे चाहे वो किसी भी राज्य, धर्म या जाती से आये।

यह तो हुई बयानबाज़ी लेकिन ज़मीनी स्तर पर क्या हक़ीक़त है ये कोई मंत्री नहीं बता सकता। बता सकते है तो सिर्फ आकड़े। भगवद् गीता के बाद अब जमाना इनका ही है। लोग इन आंकड़ों पर विश्वास करते है क्योंकि भैया आंकड़े कभी झुठ नहीं बोलते। India में स्वास्थय को लेकर बहुत सी योजनाएं बनाई जाती है। लेकिन उन योजनाओं को जमीनी हकीकत में लाना शायद मंत्री जी भुल जाते है। उन्हीं योजनाओं का नतीजा है की लोगो को सरकारी हॉस्पिटल से ज्यादा प्राइवेट अस्पतालों पर अधिक भरोसा है।

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लेकिन दु;ख की बात यह है की उन प्राइवेट हॉस्पिटल की मंहगी फीस के कारण समाज का एक तबका वहां तक नहीं पहुंच पाता। अरे जिस देश में खुद एक नेता सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने से डरता हो उस जगह की स्वास्थय सेवायें कैसी होगी इसका अंदाजा आप लगा सकते है। सरकार स्वाथ्य सेवाओं को तो सुधार नहीं पायी, लेकिन हाँ उसके लिए एक से एक योजनाए लागू कर देती है। इन्ही में से एक योजना है राष्ट्रीय स्वाथ्य बीमा योजना। ये योजना Below  Poverty line (BPL) वाले लोगो के लिए शुरू की गई थी। यह योजना 30,000 रुपये तक का बीमा कवर देती है। नौ साल पहले शुरू हुई यह स्कीम मंत्री जी के बयान की तरह खोखली साबित हुई है। April 2008 में इस स्कीम को एक प्रयोग के तहत शुरू किया गया था।

India Health

लाभार्थियों  को 30 रुपये देकर रजिस्ट्रेशन करवाना होता है बाकी खर्च राज्य एवं केंद्र सरकार मिल कर उठाती है। साथ ही इसमें 100 रुपये का ट्रांसपोर्ट खर्चा भी दिया जाता है। इसमें सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों को सम्मिलित किया गया है। कुल 707  district में से 460 डिस्ट्रिक्ट में इस स्कीम को लागू किया जा चूका है। लेकिन अभी भी India में तकरीबन 40 % BPL families इसमें शामिल नहीं हो पाई हैं।

2017 के आंकड़ों के अनुसार, 150 million लाभार्थियों के अपनी जेब से होने वाले खर्च में कोई कमी नहीं आयी है। 2016 की रिपोर्ट के अनुसार 65.3% तक खर्चा मरीज़ो को अपनी जेब से देना पड़ता है। जो की उन्हें कर्ज तले दबा देता है यह विश्व में सबसे अधिक है। 2004 से लेकर 2014 के बीच India में हॉस्पिटल के खर्चो में 10 % तक की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन बीमा के रुप में मिलने वाली राशी में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है।

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एक सर्वे के मुताबिक 35 % eligible families को  इस स्कीम के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। इसके अलावा भी इस स्कीम में बहुत सारी समस्याएँ हैं। जिसकी तरफ शायद कोई ध्यान नहीं देना चाहता। हमारे यहाँ पब्लिक हेल्थ केयर पर होने वाले खर्चा बहुत ही कम है – कुल GDP का केवल  1.2%. जो बजट allocate भी होता है। उसका 26% दवाइयों के रख रखाव पर खर्च होता है। इन सब के बावजूद भारत सरकार ने 2022 तक Universal Health Coverage को प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। जिसका मतलब है 2022 तक हर नागरिक को health care and financial protection सुनिश्चित करवाना।

तो यदि नई योजनाओं के स्थान पर पुरानी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जाए। ताकि इस देश का हर वो नागरिक उस योजना का लाभ उठा सके जो इसका हकदार हो। जो व्यक्ति सरकारी जॉब करता है उसका इलाज भी सरकारी अस्पतालों में ही हो यह अनिवार्य कर देना चाहिए चाहे वो नेता हो या कोई औऱ। तभी हम स्वस्थ भारत औऱ उज्जवल भारत के भविष्य की कामना कर सकते है।

9 COMMENTS

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