मोदी का रिश्ता और राहुल का सिक्का: Gujarat Elections 2K17

चेहरे पर शिकन, माथे पर पसीना, डरे-डरे से साहेब नज़र आते हैं, शाह-जादा, राफेल के सवालों पर, जाने क्यूँ इनके होंठ सिल जाते हैं

Gujarat Elections 2K17

चेहरे पर शिकन, माथे पर पसीना डरे-डरे से साहेब नज़र आते हैं शाह-जादा, राफेल के सवालों पर जाने क्यूँ इनके होंठ सिल जाते हैं

Gujarat Elections 2K17: गुजरात के राजनीतिक इतिहास में 90 के दशक का दौर भाजपा के लिए किसी स्वर्णकाल से कम नहीं था । क्योंकि इससे पूर्व यहां की राजनीतिक सत्ता पर कांग्रेस का आधिपत्य था । जिसे बदलना अपने-आप में एक बड़ी क्रान्ति थी । दशकों बाद मिली इस क्रान्तिकारी जीत के मायनों को समझते हुए भाजपा ने इसे बरकरार रखने के लिए कड़ी मश्शकत की है। नतीजन कांग्रेस गुजरात में कभी वापसी नहीं कर सकी । बदलती राजनीति के इस दौर में जो सबसे ज्यादा लुभावना चेहरा जो सामने आया वो था, प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का था। गुजराती जनता की बेपनाह मुहब्बत ने नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक यात्रा को लोकतांत्रिक सत्ता के शिखर तक पहुंचाया है।

Congress BJP

मोदी गुजरात आमने सामने: Gujarat Elections 2K17

किसी ने सोचा नहीं होगा कि लोकप्रियता का ये काल, भविष्य में गुजरात और मोदी को आमने-सामने ला देगा। साल 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस पर नेतृत्व का संकट भी आ पड़ा । लेकिन, इस बार कांग्रेस भी अब गुजरात के विधानसभा चुनाव में भाजपा को कांटे की टक्कर देने के लिए कमर कस चुकी है ।

राहुल के हथकंडे: Gujarat Elections 2K17

कांग्रेस के भावी अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा केन्द्र सरकार को निशाने पर रख कर पूरे जोर-शोर से अपनी चुनावी कवायद शुरु करके, हर वह हथकंड़ा अपना रहे ताकि भाजपा को परास्त कर सके । अब कांग्रेस जीतती है, या मजबूत विपक्ष बन कर सामने आती है। यह तो नतीजे ही तय करेंगे। इन चुनावों में एक जटिल बात और सामने आ रही है, वह है– मतदाताओं की, असमंजस्य में डालने वाली राय। जहां युवा वर्ग हार्दिक पटेल को अपना नेता मान रहा है। वहीं दूसरी तरफ वह यह भी कह रहे हैं, कि वे अभी नरेन्द्र मोदी को भूले नहीं हैं।

Congress BJP crowd

मोदी मैजिक: Gujarat Elections 2K17

प्रदेश के गावों में भी कांग्रेस की पकड़ फिलहाल दमदार दिख रही। लेकिन, अभी मोदी मैजिक बाकी है। राहुल गांधी के चुनावी अभियानों से जो निष्कर्ष खंगाला गया है। उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार का यह चुनाव किसी भीषण संग्राम से कम नहीं है। क्योंकि, कांग्रेस प्रबल नेतृत्व के अभाव में भी भाजपा को कड़ी टक्कर दे रही है।

मोदी का परचम: Gujarat Elections 2K17

वहीं दूसरी तरफ, भाजपा की धाक का अर्थ यहीं से लगाया जा सकता है कि, इनके पास स्टार प्रचारक नरेन्द्र मोदी व अमित शाह जैसे ऊंचे कद के नेता है। इसमें सबसे अहम बात यह है कि यह दोनों गुजरात से हैं, तथा चोखा नेतृत्व करने वाले हैं। अब की बार राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा जहां अपनी जय बरकार रखना चाहती है।

Congress BJP Sign
युवा आबादी और बेरोजगारी: Gujarat Elections 2K17

वहीं कांग्रेस भी अपनी पुरानी कोई त्रुटि नहीं दोहराना चाहती । राहुल गांधी द्वारा दनादन रैलियां करना तथा हर तबके से बात करना खासतौर से यूथ। निसंदेह कांग्रेस अपनी साख को मजबूत करने के हर सम्भव कोशिश में जुटी है। यहां एक बात ये भी जानना जरुरी है कि गुजरात की राजनीति में युवावर्ग को इसलिए तवज्जो दिया जा रहा है। क्योंकि, यहां 65 फीसद आबादी 35 साल से कम अवस्था की है।

अतः बेरोजगारी एक बडा मुद्दा है। जिसे हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर जैसे य़ुवा नेताओं ने भी काफी घसीटा है।इसमें कोई संशय नहीं कि जिस युवावर्ग नें मोदी को 2014 के चुनाव में सराखों पर बिठाया । राज्य में वही वर्ग अब उनका सिरदर्द बन कर उभर रहा है। नराज़गी के मुख्य कारण बेरोजगारी तथा आरक्षण है।

दूसरी तरफ कांग्रेस इसे भारतीय जनता पार्टी और मोदी की दमनकारी नीति बताकर पाटीदारों को आरक्षण देने के लिए राज़ी हो गई है। मतलव गांवों के पश्चात यहां भी कांग्रेस को अच्छी बढ़त मिलती दिख रही है।

Modi and Amit Shah
स्टार प्रचारक और गेम चेंजर: Gujarat Elections 2K17

अब ऐसी कशमकश में भाजपा स्टार प्रचारक और गेम चेंजर अमित शाह हर वो सम्भव प्रयास में जुट चुके हैं। जिसे कांग्रेस को मिल रहे जनसमर्थन को टैकल कर सके। अपनी रैलियों में भाजपा न सिर्फ ऐन्टी कांग्रेस के अहसास जनता में बांट रही है, ब्लकि उनका विरोध होने के बाबजूद भी वह जनता में जा रहे हैं। कारण साफ है, इस बार के गृह चनाव में उनकी अजेयता दांव पर लग चुकी है। इसलिए प्रधान सेवक नरेन्द्र मोदी संसद से अधिक महत्व प्रादेशिक चुनाव को दे रहें हैं।

यह हो सकती है, कांग्रेस कि शिकस्त की वजह: Gujarat Elections 2K17

कांग्रेस को जहां से निराशा मिल सकती है वह है, प्रदेश की सिविल सोसायटी जिसमें कांग्रेस के लिए कोई खास आकर्षण नज़र नहीं आ रहा। राज्य की सिविल सोसाइटी का कहना है कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में न तो एक बेहतर विपक्ष की भूमिका निभाई और न ही कभी अपनी टीम वर्क का परिचय दिया।

Opinion Pol

यह हो सकती है, भाजपा कि शिकस्त की वजह: Gujarat Elections 2K17

प्रदेश में चुनावों को लेकर अभी जो अनुमान सामने आ रहे हैं। उनमें बताया जा रहा है कि भाजपा की जीत में फर्क पड़ेगा। जिसकी मुख्य वजहें रहेंगी पिछले चुनावों से भाजपा के लिए मतदान करते आ रहे पाटीदार जैसे वर्ग अब पलायन कर कांग्रेस में जा रहे हैं। इसके अलावा राज्य की विकास दर कि स्थिति भी कुछ ठीक नहीं चल रही। बेरोजगारी, महंगाई, नोटबंदी, जीएसटी जैसे आर्थिक मुद्दों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। कुल मिला कर इन वर्गों का कहना है कि उनके साथ अच्छे दिन के नाम पर धोखा हुआ है।

अब कांग्रेस को अगर कड़ा मुकाबला करना है तो, पाटीदार, पटेल, अल्पसंखयक, व्यापारी के अलावा दलित वर्ग को अपनी ओर खींचना होगा। ताकि दोतरफा मुकाबला सम्भव किया जा सके।

Modi and Hardik

Middle Ungli Special:

दिल्ली और पंजाब के विधानसभा चुनावों में मिली मात के बाद मोदी और अमित शाह की अजेयता की यह अग्निपरीक्षा रहेगी । गेम चेंजर अमित शाह की उलझनें इस बार एक हद तक बढ सकती हैं। क्योंकि अब के चुनाव की मौजूदा परिस्थतियां न तो उनका साथ दे रही और न ही इस बार मुख्यमन्त्री के दावेदार का चेहरा मोदी होंगे। इसलिए मोदी कैबिनेट का हर बड़ा मन्त्री चुनावी अभियान में व्यस्त है। इसके साथ सोशल मीडिया पर भी दोनों पार्टियां एक दुसरे को उधेड़ने में लगी हुई है। हाल ही में राहुल गाँधी के ट्विटर ऑफिशल अकाउंट से तंज कसा गया।

Source: NBT

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