इकोनॉमिक सर्वे 2017-18, स्पष्ट करेगा सरकार की आर्थिक नीति

देश की मौजूदा अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर आर्थिक सर्वेक्षण का खाका सरकार ने तैयार कर लिया है। आर्थिक सर्वेक्षण या इकोनॉमिक सर्वे 2017-18 से सरकार की आर्थिक नीति भी स्पष्ट हो जायेगी। साथ ही यह भी पता चल जायेगा की क्या मौजूदा दौर में देश की जनता को अच्छे दिन के दर्शन होगें या नहीं।

Shubham Kushwah, CUHP

नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद देश की जनता को इस बार के आर्थिक सर्वेक्षण या Economic Survey का बड़ी बेसब्री से इंतजार है। Economic Survey बजट सत्र शुरू होते ही सरकार की रिवायत के अनुसार सालाना संसद में पेश किया जाता है। जिसमें सरकार मौजूदा वर्ष का पूरा लेखा-जोखा संसद में पेश करती है। पिछले दिनों सरकार द्वारा जीएसटी और नोटबंदी जैसे फैसलों का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। ऐसे में यह जानना काफी दिलचस्प होगा की वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था किस मुकाम पर है, और आने वाले दिनों में इसकी स्थिति क्या हो सकती है। ख़बर को आगे बढ़ाने से पहले आपका यह जानना बेहद जरुरी है कि आखिर इकोनॉमिक सर्वे होता क्या है………

Economic Survey

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इकोनॉमिक सर्वे सरकार द्वारा पेश किया जाने वाल एक सर्वे होता है। बीते वित्तीय वर्ष में देश की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था की समीक्षा के बाद वित्त मंत्रालय यह वार्षिक दस्तावेज बनाता है। इसे बजट सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता है। इकोनॉमिक सर्वे से हमें पता चलता है कि सरकार के फैसलों का देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर हुआ है। देश के किस क्षेत्र में कितना निवेश हुआ, कृषि समेत अन्य उद्योगों का कितना विकास हुआ इत्यादि। यह सब जानकारी हमें इस सर्वे के माध्यम से मिलती है।

सरकार ने कहा फैसले सही है

इस बार सरकार ने अपने फैंसलों को सही ठहराते हुए यह दावा किया है कि, मौजूदा स्थिति में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। सरकार का मानना है की जीएसटी के चलते देश की आर्थिक स्थिति आने वाले दिनों में और मजबूत होगी। लेकिन यदि जनता की माने तो बाजार में नोटबंदी और उसके बाद वस्तु एवं सेवा कर के आ जाने से बाज़ार में आई अस्थिरता के कारण जो नुक्सान की बात कही जा रही थी उसका सकल घरेलु उत्पाद पर सीधा असर पड़ा है। जीएसटी लागु होने के बाद सरकार का दावा था की देश में अनौपचारिक सेक्टर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है ,लेकिन इसका भी कोई स्पष्ट प्रमाण नही है।

Economic Survey

Middle Ungli Special

इस बार के Economic Survey में यह बताया गया है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में चालू खाते का घाटा डेढ़ से दो फीसदी तक होगा। राजकोषीय घाटा 3.2 फीसदी रहने का अनुमान है। तो वहीं आने वाले समय में आर्थिक विकास दर 7 से 7.5 फीसदी रहने की बात कही जा रही है। इस बार आर्थिक सर्वे की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि, इसमें कृषि पैदावारों को वाजिब दाम न मिल पाने से किसानो के बढ़ते कर्ज,आत्महत्या और बढ़ती बेरोजगारी पर कुछ भी नहीं कहा गया। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के बढ़ते दामों से आने वाले दिनों में मंहगाई दर बढ़ने का भी अनुमान लगाया जा रहा है। जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता दिखाई दे रहा है। तो अब देखना यह होगा कि आखिर देश में अच्छे दिन कब आयेंगे???

14 COMMENTS

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