साइकिल बनाम Mercedes

साइकिल बनाम Mercedes:

मैं पूरी रफ्तार से साइकिल चलाते हुएअपनी मंजिल की तरफ बढ़ रहा था। मैंने एक नजर कलाई में बंधी अपनी घड़ी को देखा आज पहली क्लास थी और मैं 15 मिनट लेट था। चारों तरफ कोहरा था ये दिल्ली के दिसंबर की ठंड थी। पिछले हफ्ते ही मेरी नाइट शिफ्ट लगी थी। रात भर लोगों के अकाउंट मिलाने के बाद थोड़ी देर पहले ही अपने ऑफिस से निकला और सीधे क्लास के लिए दौड़ता भागता जा रहा था। सीए फाइनल के लिए फाइनेंशियल अकाउंटिग की ये पहली क्लास सुबह सात बजे थी। मैं सीधे क्लास में पहुंचा सबसे पीछे की सीट पर चुपचाप बैठ गया।

मिक्की माऊस वाली चप्पल

Slipper

मैंने दायं तरफ देखा एक लड़की शॉल ओढ़कर बैठी हुई थी। पैरों में मोजे और उनपर मिक्की माऊस वाली चप्पल। दायं हाथ से कुछ रुक रुककर लिख रही थी। मैंने सामने देखा और कुछ पल बाद दुनिया मेरी आंखों से बोझिल होती गई। इसके बाद मैंने महसूस किया कोई मेरी जैकेट को खींच रहा है। मैंने और थोड़ा ध्यान दिया तो महसूस किया कि मैं किसी के कंधे पर सिर रखकर सो रहा था। मैं हड़बड़ाकर सीधे अपनी सीट पर बैठ गया मैंने दायीं तरफ देखा वो लड़की मुझे देख रही थी। मेरी हिम्मत ही नहीं हुई मैं उससे कुछ बोलूं। लेकिन जब उसने कुछ कहने के लिए अपना मुंह आगे बढ़ाया तो मैंने भी अपने कान उसके हवाले कर दिए। वो धीरे से बोली पहली क्लास की इतना excitement की रात भर सोए नहीं। मैं उसे बताना चाहता था कि मैंने रात किस बैलेंस शीट को मिलाने में काली की है लेकिन बहुत खोजने पर भी मैं अपनी अवाज नहीं ढूंढ पाया।

फिर उसकी Mercedes
Mercedes girl
http://wallpic.net

क्लास कुछ देर औऱ चली और उसके बाद सब अपनी अपनी मंजिल पर चल दिए। साइकिल को लिए मैं भी अपनी रास्ते निकलने ही वाला था तभी मैंने देखा वो कुछ दूर पर खड़ी मुझे देख रही है। मैं अभी कुछ और सोच ही पाता कि सामने से एक Mercedes आकर रुकी और पीछे की सीट पर चुपचाप बैठ गई। मैंने अपनी साइकिल देखी फिर उसकी Mercedes और एक नजर आसमान… फिर सोचा अगर ये फिल्म होती तो पक्का कहानी आगे बढ़ती लेकिन ये फिल्म नहीं थी फिर भी कल क्या हो किसको पता मैं भी अपनी मंजिल की तरफ बढ़ गया….

Gulshan Kumar Jha के जीवन में घटी हाल ही की घटना पर आधारित कहानी कुछ मामूली बदलाव किए गए हैं।

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