2011 का साइलेंट हीरो आ रहा है वापस “Anna Hazare”

अन्ना के पीछे खड़ा हुजूम एक एक कर पीछे हटता चला जाए...

Anna Hazare India's Silent Hero

Anna Hazare, India’s Silent Hero: 2011 का वो जनांदोलन कौन भूल सकता है, मेरी अपनी जितनी समझ और जीवन के दौर का अनुभव रहा है, उसमे Anna Hazare का भ्रष्टाचार के खिलाफ हुआ जनांदोलन दौर का सबसे बड़ा आंदोलन रहा है। इस आंदोलन ने भारतीय राजनीती और रणनीतियों का चेहरा ही बदल कर रख दिया। इस आंदोलन से कई ऐसे चेहरे भी खिलकर सामने आए जो आज की तारीख में चर्चित नामों में गिने जाते है, सबसे बड़ा उदाहरण अरविंद केजरीवाल। कई ऐसे चेहरे भी इस आंदोलन का हिस्सा वे लोग भी रहे जिनकी छवि समाज में पहले से बनी हुई थी, पर आंदोलन से पूरे देश में बन गई, जिनमे किरण बेदी, कुमार विश्वास, आदि हैं। अन्ना का आंदोलन नाम एक ऐसा ट्रेंड बन चुका था कि देश के लोग इसका नशा करने लगे थे। हाँ, आप इसे आंदोलन की अफीम भी कह सकते हैं।

Anna Andolan Rally

आंदोलन जब एक सीरियस रोड से गुज़र रहा था, तब अचानक ड्रामे के मोड़ पर आकर कैसे खड़ा हो गया?

चलिए थोड़ा पीछे वापस 2011 में चलते हैं, और वहीं बैठ कर समझते हैं:

2 अप्रैल 2011 कि रात करीब 12 बजे मई भोपाल के मिसरोद थाने में बैठा था, किसी केस के सिलसिले में गया हुआ था। उसी रात इंडिया और श्रीलंका का वर्ल्ड कप फाइनल मैच चल रहा था, माही और युवराज क्रीज पर थे, थाने के बाहर टी.वी. लगा हुआ था, माहौल रोमांचक बना हुआ था। वहां बैठे दो पुलिस बंधू दिल्ली में होने वाले किसी आंदोलन की बात कर रहे थे, थोड़ा अजीब था क्यूंकि एक तरफ मैच का झमाझम माहौल बना हुआ है और यहां किसी आंदोलन की बात हो रही है। मैंने इतना ध्यान न देते हुए माही की जीत वाले छक्के को एन्जॉय करना ज्यादा जरूरी समझा। परन्तु जब इंडिया मैच जीत गई और सभी बेहद खुश हो रहे थे तब भी यह महाशय उसी चर्चा में डूबे हुए थे, अब मामला मुझे कुछ गंभीर मालूम पड़ा। मैंने उनसे पूछा कि आप किस आंदोलन की बात कर रहे हैं?

उन्होंने कहा दिल्ली में Anna Hazare नाम का कोई शख्स है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करने वाले हैं।

2011 WC Final

चूँकि उम्र और समझ उतनी नहीं थी तो मै मन ही मन सिर्फ इतना सोचकर आगे बढ़ गया कि इनके तो लौ लग जाएंगे।

घर पहुंचा तो एक ख्याल आया कि अगर सच में भ्रष्टाचार खत्म हो गया तो कितनी ख़ुशी की बात होगी। यह सोचकर मै खुश हो रहा था, क्यूंकि आंदोलन के नाम पर सिर्फ गाँधी का चेहरा और आज़ादी ही ज़हन में आती थी। मुझे लगता था कि आंदोलन होता ही सफल होने के लिए है। जब देश को गैरों से आज़ादी मिल सकती है तो फिर भ्रष्टाचारी तो अपने ही है, भ्रष्टाचार से भी आज़ादी मिल जाएगी। हाँ, आप कह सकते हैं भोला था मै, और मेरे साथ-साथ देश कि जनता भी। इसी सोच के साथ मै नींद के आगोश में आ गया और सुबह जब उठा तो भूल चूका था कि रात को क्या हुआ, नशा उतर चूका था, क्यूंकि पिछले कल जन्मदिन भी था।

Anna Hazare, India's Silent Hero

“Anna Hazare” इनवर्टेड कोमा में

अगले दिन यानि 4 अप्रैल को अख़बार उठाया तो देखा दिल्ली के जंतर-मंतर पर कोई आदमी अनशन पर बैठा है, और उसकी मांग है किसी जनलोकपाल बिल को पास किया जाए, उनका मानना है की इससे भ्रष्टाचार ख़त्म हो जाएगा। बाबा अब अपनी मैमोरी ने थोड़ा रिवाइंड मारा और याद आ गयी वो रात, कि इसी मसले पर तो चर्चा हो रही थी। इस आदमी का नाम पढ़ा अपन-ने “Anna Hazare”, हाँ ऐसे ही इनवर्टेड कोमा में लिखा था। टी. वी. चालु किया तो चैनल्स पर भी वही। अपन खुश और अपने साथ-साथ देश की भोली जनता भी खुश। अगले दिन जो भी भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहता था अन्ना के आंदोलन का हिस्सा बनने लगा।

Anna Hazare

अन्ना तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ है: Anna Hazare, India’s Silent Hero

जंतर-मंतर पर हज़ारो फिर लाखों लोग जमा होने लगे। नारा निकल गया “अन्ना तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ है” शायद आपको भी याद हो। नारे ने ज़ुबान का स्वाद ही बदल दिया, जो जहां से समर्थन देना चाहता था, जैसे भी समर्थन देना चाहता था दे रहा था। रैलियों की बाढ़ आ गयी, लोगों का हुजूम इकट्ठा होने लगा समर्थकों की फेहरिस्त लाखों से करोड़ो तक पहुंच गई। ऐसा लग रहा था जैसे अन्ना खाना नहीं खा रहे हैं तो पूरा देश उनके साथ भूखा रहेगा। स्टूडेंट्स, बड़ी-बड़ी कंपनियों के कर्मचारी, छोटे दूकानदार, बड़े व्यापारी, महिलाएं, फिल्म इंडस्ट्री वाले, और तो और कई पॉलिटिशंस भी अन्ना के साथ भ्रष्टाचार से लड़ने को तैयार थे और लड़ भी रहे थे।

Anna Hazare, India's Silent Hero

India Against Corruption

9 अप्रैल को आखिरकार सरकार ने मांग पूरी करने कि बात की थी और कहा आने वाली लोकसभा मीटिंग में हम जनलोकपाल बिल को पेश करेंगे। यह सुनते ही देश में मानो कोई त्यौहार सा आ गया, सब खुशियां मनाने लगे, शायद आज़ादी के बाद यह दूसरा त्यौहार ऐसा रहा जहां बिना किसी जाती या धर्म के सभी ने एक साथ खुशियां मनाई थी। तब न असहिष्णुता पर बहस थी, न अयोध्या के मंदिर पर। हाँ, हसीन था वो पल। देश ये मान बैठा था कि अब No More भ्रष्टाचार, क्योंकि भोले थे हम। सोशल मीडिया का एक नया रूप देखने को मिला जब Facebook पर एक India Against Corruption नाम का पेज बना, और देखते ही देखते लाखों लोग उस पेज पर एक साथ जुड़ गए। ऐसा भारत के इतिहास में पहली बार हुआ था।

अगर सरकार वाला दूसरा बिल पास होगा तो…

16 अप्रैल को लोकसभा में इस मुद्दे पर पहली मीटिंग की गई जिसमे सारी बातों को रिकॉर्ड किया गया। 9 जून को अन्ना ने इस आंदोलन को ‘दूसरा आज़ादी आंदोलन’ नाम से संबोधित किया और सरकार को 15 अगस्त तक का समय दिया। अन्ना ने यह चेतावनी भी दी कि यदि 15 अगस्त तक बिल पास नहीं किया गया तो वे दोबारा 16 अगस्त से भूख हड़ताल करेंगे। 16 जून को दोबारा 2 बिल पेश किए गए। क्योंकि सिविल सोसाइटी और सरकार के बीच कुछ बिंदुओं पर मतभेद थे। लेकिन जो दूसरा बिल बना उसने अन्ना की 71 मांगों में से सिर्फ 15 ही लिखी गयी। जिसपर अन्ना का कहना था कि यह जायज़ नहीं है अगर सरकार वाला दूसरा बिल पास होगा तो भी वे 16 अगस्त से भूख हड़ताल करेंगे।

Anna Hazare

अन्ना ने जेल से बहार आने से मना कर दिया

15 अगस्त को सरकार बिल पास करने में नाकाम रही जिसपर अन्ना ने दोबारा अनशन पर बैठने का फैसला सुनाया। 16 अगस्त को अन्ना को घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी गयी, परन्तु अन्ना नहीं माने जिसके चलते उन्हें 7 दिनों के लिए तिहाड़ जेल में जाने का फरमान सुना दिया गया। किरण बेदी और शांति भूषण के आग्रह के बाद भी अन्ना ने जेल से बाहर आने से मना कर दिया, और वे जेल में ही अनशन पर बैठ गए। 18 अगस्त को लोगों के काफी मनाने के बाद अन्ना बाहर आने को तैयार हो गए पर उन्होंने कहा कि वे एक रात और तिहाड़ में रहना चाहते हैं तब तक राम लीला मैदान में अनशन की सारी व्यवस्था की जाए।

Anna Andolan

19 अगस्त से 25 अगस्त:

19 अगस्त को अन्ना रामलीला मैदान पहुंचे और लोगों के हुजूम ने जोरदार तालियों के साथ अन्ना का स्वागत किया। अन्ना ने लोगों से वादा किया कि वे अपना उपवास नहीं छोड़ेंगे जब तक बिल पास नहीं हो जाता। 22 अगस्त को श्री श्री रविशंकर इस मसले पर अडवाणी से चर्चा करने पहुंचे जहां कोई निष्कर्ष नहीं निकला, 23 को पूर्व प्रधान मंत्री मन मोहन सिंह ने अन्ना से उपवास तोड़ने का आग्रह किया परन्तु अन्ना नहीं माने। 25 अगस्त को आखिरकार प्रधानमंत्री ने, सरकार को संसद में लोकपाल बिल कि समस्याओं पर बहस करने की इजाजत दी। अन्ना ने सभी राज्यों में लोकपाल शक्तियों के साथ नागरिकों के चार्टर, लोकायुक्तों, और उच्चतम नौकरशाही से लेकर निचले स्तर के लोगों के शामिल होने की मांग की।

Anna Hazare

अन्ना का फिर खून खौला

27 अगस्त को पार्लियामेंट में अन्ना की तीनो मांगों को मान लिया, इस पर उन्होंने अगले दिन अपना उपवास तोड़ने की घोषणा कर दी। 11 दिसंबर को अन्ना ने फिर से जंतर मंतर पर भ्रष्टाचार विरोधी उपायों पर पार्लियामेंट कमेटी के प्रस्तावों के खिलाफ एक दिन का उपवास रखकर विरोध किया। जिसके एवज में तुरंत भाजपा, सीआईपी, सीआईपी (एम), तेदेपा, जद (यू), बीजद और अकाली दल ने लोकपाल बिल पर सार्वजनिक बहस में भाग लिया। 22 दिसंबर को बिल की पेशकश में लगातार देरी की गयी और टालमटोली चलती रही। अन्ना का फिर खून खौला और अन्ना ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए 27 से 29 दिसंबर तक की उपवास रखने की घोषणा कर दी।

Rally

अन्ना के पीछे खड़ा हुजूम एक एक कर पीछे हटता चला जाए….

28 दिसंबर को अन्ना के ख़राब स्वास्थ्य के चलते अन्ना को अपना उपवास तोड़ना पड़ा। और घंटो तक लोकपाल बिल पर चली डिबेट में कुछ समाधान नहीं निकला, और बिल अटक कर रह गया राज्य सभा में। मुद्दे को जबरदस्ती इतना खींच तान कर लम्बा ले जाया गया ताकि अन्ना के पीछे खड़ा हुजूम एक-एक कर पीछे हटता चला जाए और वही हुआ। किरण बेदी ने तो यह भी कहा कि कांग्रेस ने अन्ना को बहुत बड़ा धोखा दिया है। 3 जून को अन्ना ने एक बार फिर हिम्मत बाँधी और योग गुरु हाँ वही पतंजलि वाले, के साथ मिलकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिन का उपवास रखा, जिस पर सरकार की मक्खी भी नहीं उड़ी।

Middle Ungli Special:

शायद हम यही deserve भी करते हैं, क्यूंकि भोले हैं हम। कोई हमे भ्रष्टाचार से मुक्त करने के सपने दिखता है तो हम मान जाते हैं, कोई हमे 15 लाख दिलवाने का वायदा करता है, तो हम मान जाते हैं , कोई हमे काला धन वापस दिलवाने का वायदा करता है तो हम मान जाते हैं , एक चोर दुसरे चोर की तरफ उंगली दिखा कर कहता है कि वो ज्यादा बड़ा चोर है, तो उसे अच्छा मान जाते हैं हम, क्यों?? क्यूंकि भोले हैं हम।

Anna Kejriwal

Anna Hazare इस कमिंग बैक:
  • 23 मार्च 2018 से शुरू करेंगे अन्ना आंदोलन।
  • राम लीला मैदान से होगी शुरुआत।
  • अन्ना बोले इस बार नहीं बनने दूंगा दूसरा केजरीवाल।
  • केजरीवाल ने नई पार्टी बनायीं तो नहीं रखा मैंने कोई वास्ता।
  • सदस्यों को स्टाम्प पेपर पर लिख कर देना होगा नहीं लेंगे राजनीति में भागीदारी।
  • लोकपाल की नियुक्ति, किसानों की समस्या, चुनाव सुधार होगा आंदोलन का लक्ष्य।
  • बैक टू बैक मोदी सरकार पर साधे अन्ना ने निशाने, पूछा कहाँ है काला धन?
  • अन्ना ने यह भी पूछा किसके खाते में पहुंचाए 15-15 लाख रूपए?

News Source: NDTV, Youth Ki Awaaz

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