Fortis Hospital ने दोहरायी गब्बर इज बैक की कहानी

डेंगू से 7 साल की बच्ची की मौत , शव ले जाने के बदले अस्पताल ने मांगे 18 लाख रुपये

Fortis Hospital
भारत देश में समस्याएं नये-नये रुपों में जन्म लेती है, वैसे तो भारत में स्वास्थ्य सेवाएं राम भरोसे ही है लेकिन फिर भी गरीब लोग सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगाने को मजबूर है। जो मजबुर है उनका कारवां तो यहांं तक आकर रुक जाता है। लेकिन जो आर्थिक रुप से थोड़े सही है वे प्राइवेट हॉस्पिटल का रुख कर लेते है। वे प्राइवेट हॉस्पिटल जो बेहतर सुविधाओं के नाम पर मरीजों के अकांउट से अच्छा खासा पैसा हड़प लेते है। मामला गुरुग्राम के Fortis Hospital का है, जहां पर डेंगू से 7 साल की बच्ची की मौत हो गई। यह वही Fortis Hospital है जो न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपनी बेहतर सुविधाओं के ढोल पीटता नज़र आता है। लेकिन इस बार इसने सारी हदों को पार करते हुए डेंगू की चपेट में आई एक बच्ची के नाम पर 18 लाख रूपए का बिल बना डाला। वो बच्ची जिसकी जान बचाने में तो वे असफल रहे, लेकिन 18 लाख का भारी भरकम बिल बड़े हक से मांग रहे है।

Fortis Hospital

बात शुरु करने से पहले जरा इस मामले से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां आपको दी जाये………..
  • मरने वाली बच्ची का नाम आदया है
  • मां-बाप के साथ द्वारका में रहती थी आदया
  • डेंगू के चलते 31 अगस्त को करवाया गया था Fortis Hospital में भर्ती
  • 14 सितंबर को इलाज के दौरान हो गई थी मौत
  • 2700 दस्तानों के साथ, कुल बिल 18 लाख
  • 15 दिनों तक अस्पताल में भर्ती थी आदया

Fortis Hospital

Fortis Hospital Gurugram

फिल्म गब्बर इज बैक तो आपने देखी ही होगी जिसमें एक मरे हुए पेशेंट के नाम पर कैसे हॉस्पिटल द्वारा लाखों रुपये हड़प लिये जाते है। ठीक वही कहानी इस बार गुरुग्राम में स्थित Fortis Hospital में देखने को मिली, माफ कीजियेगा लेकिन इस बार यह कोई फिल्म की कहानी नहीं बल्कि असल जिंदगी में हुआ एक कड़वा सच था। जहां पर उस बच्ची का शव ले जाने के लिए हॉस्पिटल वालों ने 18 लाख रु मांग लिये, जब परिवार वालों ने बिल की पुष्टि करनी चाही तो उन्होनें बिल की रसीद सामने लाकर रख दी। जिसमें बहुत ही अदब के साथ हर एक छोटी बड़ी चीजों को जोड़-जोड़ कर इतना बड़ा बिल बनाया गया था।

Fortis Hospital

तो चलिए आपको बताते है कि प्राइवेट हॉस्पिटल में इतना बड़ा बिल कैसे बनाये जाता है, ताकि आप भी वहां इलाज कराने से पहले 10 बार माफ कीजियेगा 100 बार सोचें………
  • लगभग 20 पन्नों का बिल तैयार किया गया
  • जिसमें सिर्फ दवाई का खर्च 4 लाख रूपए दिखाया गया
  • 2700 ग्लव्स, 660 सीरिंज का बिल और 900 रूपए गाउन का चार्ज
  • डॉक्टर की फीस 52 हजार रु, मेडिकल टेस्ट 2 लाख 17 हजार रूपए
  • बिल की कुल राशी लगभग 18 लाख रूपए
सरकार की प्रतिक्रिया 

यह एक ओछे हॉस्पिटल बिल का मोटा मोटा हिसाब है, इसमें बच्ची को पहनाये गए गाउन से लेकर डॉक्टरों द्वारा नाक पोछने वाले ग्लव्स तक का हिसाब है। एक रिश्तेदार ने यह फोर्टिस का यह कारनामा जब ट्विटर पर शेयर किया तो लोगों का ट्विटर पर गुस्सा फूटना शुरू हो गया। ट्वीट वायरल होते हुए जा पहुंचा स्वास्थ्य मंत्री जेप्पी नड्डा तक, नड्डा ने ट्वीट कर मामले की पूरी जानकारी मांगी एवं उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। बच्ची के पिता ने एएनआई के कैमरे पर प्रशासन से जांच की मांग की और यदि जरुरत पड़े तो इस समस्या पर कानून में सुधार लाने की बात भी कही, ताकि किसी और को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े। फोर्टिस ने अपने जवाब में प्रोटोकॉल और मेडिकल गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि सभी दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए ही इलाज किया गया है।

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देश में ऐसी बहुत सी घटनाएं देखने को मिलती हैं जहां परिवार से इतनी भारी भरकम रकम बिल के ऐवज में ली जाती है। लेकिन यदि हम इस मामले की बात करें तो परिवार वालों ने हॉस्पिटल वालों पर यह आरोप लगाया है कि उन्हें झूठ बोला गया कि आदया को बचाया जा सकता है। जबकि वो नन्ही सी परी पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह चुकि थी। अब इसका फैसला आप ही कीजिये की यदि जान बचाने वाला डॉक्टर ही ऐसा करेगा तो फिर लोग किस पर भरोसा करेंगे। सरकार ने मामले से जुडी जानकारी देने की बात तो कही है, लेकिन देखना यह होगा की क्या मामले की आगे जांच होगी या फिर इसे भी सरकारी फाइलों के बोझ तले कहीं दबा दिया जायेगा।

News Source : Ndtv

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